इसके तेल की मालिश से त्‍वचा नरम व चमकदार होती है। पहले जब बेबी ऑयल नहीं आए थे या प्रचलन में नहीं थे तो नवजात शिशुओं की मालिश सरसों के तेल से ही होती थी। आज भी गांवों में यह परंपरा कायम है।

सरसों का औषधीय लाभ और उपयोग

– सरसों का तेल बालों के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद है। इसमें ओलिक एसिड व लीनोलिक एसिड होता है जौ फ़ैटी एसिड कहा जाता है। यह बालों की जड़ों को मज़बूत करता है। इसके नियमित सेवन से बालों का झड़ना रुकने लगता है।

– सरसों के तेल में नमक मिलाकर दांत साफ़ करने से दांत व मसूढ़े मज़बूत होते हैं। पायरिया में भी काफ़ी लाभ मिलता है।

– सरसों का तेल सिर पर रखने से या शरीर में मालिश करने से सर्दी-जुखाम, सिरदर्द, शरीर के दर्द में आराम मिलता है।

– एलिल आइसोथियोसाइनेट के गुणों से युक्‍त सरसों का तेल त्‍वचा की बीमारियों में काफ़ी लाभप्रद है। यह फ़ंगस को बढ़ने नहीं देता।

– सरसों का तेल ठंड को दूर भगाता है, गरमाहट पैदा करता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करता है।

– सरसों का तेल भूख व पाचन क्षमता दोनों की वृद्धि करता है।

– सरसों के तेल में विटामिन ई होने से यह सूर्य की अल्‍ट्रावायलेट किरणों से त्‍वचा की रक्षा करता है।

– इसे चेहरे व त्‍वचा में लगाने से झाइयां व झुर्रियां कम होती हैं।

– गठिया व जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल से मालिश से आराम होता है।

– भोजन में इस तेल के नियमित प्रयोग से कोरोनरी हार्ट डिज़ीज की आशंका कम हो जाती है।

– सरसों का तेल त्‍वचा में लगाकर स्‍नान करने से त्‍वचा नरम व पुष्ट होती है।

– सूजन में सरसों पीसकर लगाने से आराम मिलता है।

– कफ व खांसी में सरसों को पीसकर शहद के साथ चाटने से आराम मिलता है।

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