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अभिभावकों का कहना है कि जब तक कोरोना महामारी को नियंत्रित न कर लिया जाये तब तक स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए। स्कूल खुल जाने से बच्चों में इस महामारी के फैलने का खतरा ज्यादा बढ़ा जाएगा। यह बात सोशल मीडिया प्लेटफार्म लोकल सर्कल्स द्वारा कराए गए एक सर्वे में सामने आई है। दरअसल, लोकल सर्कल्स ने सितंबर माह में सरकार के स्कूल खोलने के विचार पर दिल्ली-एनसीआर के 3443 अभिभावकों को लेकर एक एक सर्व कराया, जिनमें से मात्र 31 फीसदी अभिभावक ही सरकार के इस विचार के पक्ष में हैं, जबकि 61 फीसद अभिभावक इस फैसले के खिलाफ हैं।

वहीं आठ फीसद अभिभावकों ने इस मामले में कोई जवाब देना उचित नहीं समझा। लोकल सर्कल्स ने दिल्ली-एनसीआर में कराये गये सर्वे में 1786 अभिभावकों से पूछा कि क्या वह सितंबर से स्कूल खोलने के पक्ष में हैं, जिसमें 31 फीसद ने हां में जवाब दिया। 61 फीसद ने ना में जवाब दिया। करीब 1657 अभिभावकों से दूसरा सवाल पूछा गया कि वह स्कूल खोलने के पक्ष में क्यों नहीं हैं, तो 16 फीसद अभिभावकों ने जवाब दिया कि कोरोना महामारी के चलते वह अपने बच्चों को स्कूल भेजकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। दो फीसद अभिभावक बोले कहीं बच्चों को कोरोना होने पर घर के बुजुर्ग सदस्य भी इस महामारी की चपेट में आ सकते हैं।

महामारी में हो सकता है इजाफा 

सात फीसद अभिभावकों का मानना है कि अगर स्कूल खुलता है और बच्चों को स्कूल बुलाया जाता है तो कोरोना मरीजों की संख्या ने तेजी से इजाफा होगा। दूसरी ओर आठ फीसद अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में सोशल डिस्टेंशिंग का पालन संभव नहीं है। दो फीसद अभिभावकों का मानना है कि कोरोना की स्थिति को देखते हुए ऑनलाइन शिक्षा ही सही विकल्प है। वहीं, 19 फीसद अभिभावकों का कहना है कि वह एक सितंबर से स्कूल खोलने के विरोध में नहीं हैं।

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