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इतना ही नहीं व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन (सीआईबीएम) योजना के अन्तर्गत पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ द्वारा संचालित सभी 1923 सीमा चौकियों को सेंसर, सीसीटीवी और ड्रोन फीड से लैस जाएगा। इसमें करीब 1,500 सीमा चौकियों की रेकी करने और एंटी ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल करने में सक्षम होंगे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, छोटे और माइक्रो ड्रोन की लागत लगभग 88 करोड़ रुपये आएगी। इतना ही नहीं सुरक्षा एजेंसियों की सहायता से बीएसएफ इस वक्त संवेदनशील पंजाब सीमा पर स्वदेशी एंटी ड्रोन सिस्टम का परीक्षण कर रही है। आपको बता दें कि बीते एक वर्ष में पाकिस्तान, पंजाब में खालिस्तानी आतंकियों और जम्मू कश्मीर में जिहादियों को राइफल, पिस्तौल और ग्रेनेड पहुंचाने के लिए चीनी ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है।

आपको बता दें राकेश अस्थाना नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में महानिदेशक का प्रभार भी संभालते हैं, ऐसे में बीएसएफ की खुफिया ब्रांच को फिर जीवित किया जा रहा है, ताकि अफगानी ड्रग्स पाकिस्तान का बार्डर पार न कर पाएं। इसके लिए, बीएसएफ और एनसीबी के बीच पंजाब और जम्मू-कश्मीर दोनों में सीमा पार से हथियारों की तस्करी और ड्रग्स के बड़े किंगपिन को लाने के लिए एक आम रणनीति अपनाई जाएगी।

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