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ज्ञात हो कि दिशा की मौत 8 जून को मुंबई की एक बिल्डिंग से गिरने से हुई थी। जबकि दिशा का फोन 8 से लेकर 17 जून, 2020 तक कोई इस्तेमाल कर रहा था और लगातार उससे कई फोन कॉल्स किए गए थे। ऐसे में सवाल उठाता है कि आखिर दिशा की मौत के बाद उसके फोन को कौन इस्तेमाल कर रहा था।

आखिर मुंबई पुलिस ने दिशा के फोन फोरेंसिक जांच के लिए क्यों नहीं भेजा। जबकि जांच के नियमों के मुताबिक जब भी किसी की सदिग्ध अवस्था में मौत या फिर आत्महत्या होती है तो ऐसे मामलों में पुलिस मृतक का फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजती है। दिशा के फोन से जुड़ा यह खुलासा मुंबई पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही दिशा सालियान की मौत को साथ में जोड़ कर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया की खबरों के मुताबिक सुशांत की मौत दिशा के साथ ही जुड़ी हुई है। दोनों की हत्या में एक ही इंसान के शामिल होने की बात हो रही है।

दिशा की मौत एक बिल्डिंग से गिरकर हुई थी, जिसे पुलिस ने सुसाइड मान लिया था। जबकि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था। इस घटना के एक हफ्ते के अंदर 14 जून को सुशांत की भी मौत हो गई, पुलिस ने इसे भी सुसाइड मान लिया। जबकि इसमें भी कोई सुसाइड नोट नहीं बरामद हुआ था।

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