राज्य में लौटने के बाद जुबैर ने बताया कि वो करीब दो महीने पहले ही दिल्ली में नौकरी की तलाश करने गए थे. लेकिन अब उनका कहना है कि इसके बाद वो कभी भी वापस दिल्ली नहीं जाएंगे. उन्होंने ये भी बताया कि गाजीपुर में वो मछलियों की एक मंडी कारोबार से जुड़े थे, जहां उन्हें हर दिन 200 रुपए मिल जाता था. लेकिन इसी बीच सरकार की ओर से देशभर में लॉकडाउन जारी कर दिया गया. इसके आगे उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद से ही खराब आर्थिक हालत का उन्हें एहसास होने लगा. ऐसे में उन्होंने 23 अप्रैल को कुछ पिटे हुए चावल, गुड़ और नमकीन पैक की और अपने स्थानीय निवास अररिया के लिए तिपहिया साइकिल से निकल पड़े.

फिलहाल जब ये खबर आई तब भी जुबैर गोपालगंज चेकपोस्ट प्रवासियों के पंजीकरण के लिए एक लंबी लाइन में खड़े हैं, यहां पर वो ऐसी बस का इंतजार कर रहे हैं, जो उनके तिपहिया साइकिल को अपने बस की छत पर रखकर साथ ले जा सके. जानकारी के मुताबिक इस चेक पोस्ट के पास दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के प्रवासियों के और भी बड़े-बड़े समूह मौजूद हैं. जानने वाली बात तो ये है कि बिहार के 38 में से 25 जिलों के लोगों के लिए यही एकमात्र प्रवेश द्वार है. अभी तक यहां पर जितने लोग कतार में खड़े हैं उनमें से ज्यादातर प्रवासी अररिया, कटिहार, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, समस्तीपुर, किशनगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण के हैं.

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