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कोरोना महामारी के बीच उत्तर प्रदेश में ऐसा संकट खड़ा हो गया है, जिससे बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। निजी स्कूलों की फीस को लेकर पेरेंट्स एसोसिएशन और प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के बीच विवाद खड़ा हो गया हैं। बच्चों की फीस को लेकर पेरेंट्स एसोसिएशन नेसाफ बोल दिया है कि वो फीस जमा नहीं करेंगे। उनका कहना है कि लॉकडाउन के दौरान जब पढ़ाई नहीं हुई तो फीस किस बात की जमा की जाये। इसके साथ ही पेरेंट्स एसोसिएशन ऑनलाइन क्लास को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभिभावकों का कहना है कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी वो फीस नहीं जमा करेंगे। स्कूल खुले नहीं और बात रही ऑनलाइन क्लास की वो भी सही से नहीं हुई। वहीं कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन में सभी काम बंद रहे हैं। ऐसे में फीस के लिए रूपए कहा से लेकर आएंगे। अगर स्कूल ने बच्चों को नाम काटा तो स्कूल के बाहर टाला लगा देंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश अभिभावक संघ और ऑल स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन के बीच बैठक रविवार को हुई, जिसमे स्कूल संचालकों की मनमानी को लेकर विरोध जताया गया। वहीं प्रशासन पर सवाल उठाते भी कहा गया कि बच्चों के रिजल्ट रोक दिए गए अधिकारी चुप हैं।

अभिभावकों प्रशासन की कार्यप्रणाली से भी नाराज दिखे। उनका कहना है कि स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और ऑनलाइन एग्जाम देने से बच्चों को रोक रहे हैं। हम पर फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। पढ़ाई ऑनलइन हो रही है लेकिन हम पर दबाव ऑफलाइन क्लास की तरह ही पूरी ही ली जा रही है।

वहीं शनिवार को CIS ने बैठक की थी, जिसके बाद कहा था कि सभी छात्रों को फीस जमा करनी ही होगी। जो बकाया है उसे भी करना होगा और नए स्तर की भी फीस देनी होगी। किसी तरह की कोई भी छूट किसी को नहीं मिलेगी। वहीं जिन छात्रों की फीस जमा नहीं होगी उनका नाम काट दिया जाएगा। स्कूल संचालकों ने तय किया है कि कोरोना संकट के दौरान सरकारी कर्मचारी, चिकित्सा और स्वास्थ्य,फल विक्रेता, दूध विक्रेता, किराना, फैक्ट्री संचालक से पूरी फीस ली जाएगी क्योंकि इनका काम बंद नहीं है।

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