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सोमवार को जबलपुर हाईकोर्ट ने सतना निवासी प्रीति सिंह की याचिका सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। बता दें की सतना निवासी प्रीती सिंह ने जबलपुर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने अपने वकील के माध्यम से दलील दी थी कि उनकी मां मोहिनी सिंह जो कि कोलगवां पुलिस स्टेशन में बतौर ASI तैनात थी की साल 2014 में एक सड़क हादसे में मौत हो गयी थी। प्रीति सिंह ने कहा मां की मौत के बाद उन्होंने मां के स्थान पर मृतक आश्रित की नौकरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन भोपाल पुलिस मुख्यालय ने उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया।

वकील ने दी यह दलील

उन्होंने कहा भोपाल मुख्यालय ने उनके आवेदन को सिर्फ इसलिए रिजेक्ट कर दिया क्योंकि वह विवाहित हैं। ऐसे में वह अनुकंपा नियुक्ति की हकदार नहीं हैं। प्रीति सिंह की इस याचिका पर जज संजय द्विवेदी के सामने उनके वकील ने अपना पक्ष रखते हुए दलील दी भारतीय संविधान के आर्टिकल-14 में देश के हर नागरिक को समानता का अधिकार प्रदान किया गया है। ऐसे में अनुकंपा नियुक्ति में ऐसा भेदभाव क्यों किया गया है। वकील ने दलील दी कि जब एक शादीशुदा पुत्र अनुकंपा नियुक्ति पा सकता है तो पुत्री को यह अधिकार क्यों नहीं दिया गया?

नजीर साबित होगा फैसला

इस पर जबलपुर हाईकोर्ट ने वकील की दलीलों को वाजिब ठहराते हुए प्रीति सिंह को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को शादीशुदा होने के बावजूद अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। हाईकोर्ट का यह फैसला बेटियों के लिए अनुकंपा नौकरी ने नजीर साबित हो सकता है क्योंकि इसके पहले विवाहित लड़कियों को मृतक आश्रित की नौकरी से बाहर रखा जाता था।

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