11

भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 15 जून की रात हुई हिंसक झड़प में चीनी सेना के 60 से भी ज्यादा सैनिकों की मौत हुई थी। भारतीय सीमा में घुसकर सेना पर हमला करने की पूरी प्लानिंग चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की थी। लेकिन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ऐसा करने में असफल साबित हुई और उल्टा उन्हें भी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। आर्टिकल में कहा गया है कि चीनी सेना को भारतीय सीमा पर जो हार नसीब हुई है, उसका दुष्प्रभाव चीन को बाद में दिखेगा।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सेना पहले ही कह चुकी सेना में जो विरोधी हैं उन्हें तुरंत बाहर किया जाए और उन लोगों की भर्ती की जाए और सेना के प्रति ईमानदार हों। जिसके बाद अब माना जा रहा है कि चीनी सेना के कई बड़े अधिकारियों पर राष्ट्रपति की नजर टेडी हो सकती है। जून माह में मिली बड़ी असफलता के बाद माना जा रहा है कि चीनी राष्ट्रपति दोबारा भारत के खिलाफ कोई साजिश रच सकते हैं। गौरतलब है कि लद्दाख के तीन क्षेत्रों में भारत और चीन के बीच अस्थायी सीमा है यानी यहां कोई सीमा तय नहीं है।

चीन की सेना कई बार भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर चुकी है। लेकिन यह घुसपैठ वर्ष 2012 से तब ज्यादा बढ़ गयी जब शी जिनपिंग पार्टी के जनरल सेक्रेटरी बनें। एलएसी पर चीन की सेना मई (2020) माह की शुरुआत में ही धीरे-धीरे आगे बढ़ना शुरू कर चुकी थी। विश्व के दो सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश भारत और चीन के सैनिकों के बीच 45 वर्ष बाद गलवां घाटी में हिंसक झड़प हुई। जिसमे भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। जबकि चीन ने अब अपने सैनिकों की मौत का खुलासा नहीं किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here