अब कई देशों की कंपनियां चीन में लगे अपने कारखानों को हटाने की भी तैयारी कर रही है। माना जा रहा है इनमे से अधिकांश कंपनियां जल्द भारत में अपना नया ठिकाना ढूंढ सकती हैं। इस मौके को भुनाने में केंद्र सरकार भी पीछे नहीं रहना चाहती है।

कोरोना महामारी के दौरान भारत में ऐसे काई प्रोडक्ट बनने शुरू हो गए जो कुछ वक़्त पहले तक चीन से आया करते थे। पीएम मोदी ने देश को आत्मनिर्भर बनाने की अपील के बाद अब लोग स्वदेशी प्रोडक्ट पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। बीते दिनों सरकार दिए गए 20 लाख करोड़ के पैकेज के बाद देश में चल रहे छोटे उद्योगों को नई ऊर्जा मिली है। सरकार की इस मुहिम को अब देश के बड़े उद्योगपति भी सहयोग कर रहे हैं। जिससे देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जा सके। और इस वक़्त चीनी वस्तुओं पर जो निर्भरता है उसे खत्म किया जा सके। 10 जून से देश के व्यापारियों के शीर्ष संगठन (कैट) चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर अभियान शुरू करेंगे।

दिसंबर 2021 तक चीनी वस्तुओं की आयात में करीब 1 लाख करोड़ रुपए कम करने का लक्ष्य कैट ने रखा है। चीन से आयात होने वाले करीब तीन हज़ार ऐसे उत्पादों की ऐसी सूची कैट ने बनाई है जिन वस्तुओं के आयात अब न होने से भी भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। क्योंकि इन्हे भारत में पहले से ही बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2001 में भारत में चीनी वस्तुओं का आयात केवल 2 अरब डॉलर का था, जो वर्ष 2019 में 70 अरब डॉलर हो गया है। सिर्फ 20 वर्षों में यह आयात लगभग 35 गुना बढ़ गया। वहीं मोदी सरकार के आने के बाद ‘मेक इन इंडिया’ मुहीम शुरू होने के बाद से अब तक चीन से आयात में लगभग 6 अरब डॉलर की कम हुआ है।

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