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भारत सरकार ने यूटी प्रशासन को ऐसे सभी लोगों को राशन देने की इजाजत दे दी है। जिन्हे बीते दिनों लॉकडाउन के दौरान राशन नहीं मिला है। प्रशासन द्वारा ऐसे लोगों का सर्वे भी करावा लिया है जिन्हें अब राशन दिया जाएगा। अब तक मिली जानकरी मुताबिक करीब 6 हज़ार लोगों को प्रशासन द्वारा चिन्हित किया गया है। गरीब मजदूरों को लॉकडाउन के दौरान हुई इस परेशानी को लेकर बीते कई दिनों से मीडिया एक मुहीम चला रही थी।

सरकार से मंजूरी मिलने के बाद से अब प्रशासन ने लेबर डिपार्टमेंट और फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट को ऐसे लोगों के आंकड़े एकत्र करने के आदेश दे दिए है जिनके पास लॉकडाउन के दौरान राशन कार्ड नहीं थे।जिसके बाद ऐसे लोगों के आंकड़े जुटाए जा रहे थे। प्रशासन के पास अब तक 6 हज़ार लोगों की लिस्ट आ चुकी है। जिसमे सभी के परिवार के सदस्यों की संख्या, वर्तमान पता, स्थाई पता और मोबाइल नंबर सहित दूसरी सभी जरुरी जानकारियां मौजूद हैं। जरूरतमंद लोगों को अब अधिकारी द्वारा लिस्ट में मौजूद मोबाइल नंबर पर कॉल करके बुलाया जायेगा और उन्हें राशन दिया जायेगा।

लॉकडाउन के दौरान शहर के 64 हज़ार परिवारों को 3 माह के लिए प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं, 1 किलो चने की दाल मिली है। यह राशन सिर्फ उन ही परिवारों को मिला जिनके पास राशन कार्ड मौजूद है। इस दौरान कुछ ऐसे भी लोग थे जिनके पास राशन कार्ड नहीं था। लेकिन कार्ड न होने वजह से उन्हें सरकार की योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। इस बारे में जब पंजाब के गवर्नर वीपी सिंह बदनौर को जानकारी हुई तो उन्होंने 29 अप्रैल को फूड एंड सप्लाई विभाग के सेक्रेटरी विनोद पी कावले को एक ऐसी योजना तैयार करने के आदेश दिये थे, जिसके अंतर्गत उन लोगों की भी मदद की जा सके जिनके पास इस वक़्त राशन कार्ड नही है।

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