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जारी एक रिसर्च के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों की इम्युनिटी ज्यादा दिनों तक बरकरार नहीं रह सकती। ऐंटिबॉडीज पर दुनिया के अलग-अलग देशों की ओर से की गई स्टडीज में पता चला है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को लड़ने के लिए जो ऐंटिबॉडीज शरीर में बनती हैं, वह कुछ समय बाद शरीर में अपने आप खत्म हो जाती हैं। ऐसे स्थिति में ठीक हुए व्यक्ति को दोबारा संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

इतना ही नहीं रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जब मरीज के शरीर में कोरोना के लक्षण नजर आते हैं उसके बाद लगभग 3 हफ्ते तक ऐंटिबॉडीज शरीर में बहुत बड़ी मात्रा में मौजूद होती हैं और यह शरीर में लगातार बनता रहता है। लेकिन दिक्कत यह कि ये ऐंटिबॉडीज ज्यादा दिनों तक जीवित नहीं रहती। इसलिए जो व्यक्ति कोरोना वायरस एक बार ठीक हो चुका है, उसके दोबारा संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। फिलहाल तीन महीने के बाद मात्र 16.7 प्रतिशत लोगों ने ही कोरोना से ठीक होने के बाद भी ऐंटिबॉडीज को शरीर में बनाए रखा, वहीं 90 दिनों के बाद किसी भी ठीक हुए मरीज के शरीर में ऐंटिबॉडीज नहीं मिला।

गौरतलब है कि जब शरीर एक बाहरी संक्रमण का सामना करता है जैसे कि वायरस, ऐसे में वह कोशिकाओं को एकत्रित कर वायरस को समझता है और फिर उससे लड़कर खत्म करने का प्रयास करता है। इसी तरह कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज जब इस संक्रमण से ठीक हो जाता है। मतलब जब उसकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने लगती है, इसके बाद भी उसके शरीर में लगभग 2 सप्ताह तक इस वायरस की मौजूदगी रह सकती है। जो उसके संपर्क में अन्य व्यक्तियों को संक्रमित कर सकती है।

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