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विभाग के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश के अनुसार 400 मरीजों पर रिसर्च होगा। इसमें मेरठ के मरीज शामिल होंगे। सामान्य लोगों के साथ मरीजों की तीन श्रेणियां रिसर्च का हिस्सा होंगी। स्वस्थ्य व बिना लक्षण वालों मरीजों को शामिल किया जायेगा। उसके बाद हल्के व गंभीर लक्षण वाले मरीजों को शामिल होंगे। इस रिसर्च में शामिल लोगों से खास गुब्बारे में मुंह से हवा भराई जाएगी। फिर उसकी एहतियात के साथ जांच पड़ताल होगी। खास तकनीक का जांच में प्रयोग होगा। कोरोना वायरस कितनी देर हवा में टिकता है?

हवा में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगाने के साथ मरीज किस स्टेज में पहुंचकर अधिक वायरस फैलाता है। इसकी भी जानकारी की जाएगी। भर्ती मरीजों से हर पांच-पांच दिन पर गुब्बारे में सांस का नमूना लिया जाएगा। इससे यह भी मालूम चलेगा कि बीमारी की किस अवस्था में मरीज की सांस व मुंह से अधिक वायरस निकलते हैं। इसका लाभ मरीजों के इलाज में मिलेगा। बीमारी की गंभीरता के समय क्या सावधानी बरतनी है। इलाज में क्या तब्दीली करनी है? आवश्यक कदम उठाने में सहयता मिलेगी।

कोरोना वायरस महिला अधिक फैला रही हैं या पुरुष। इसका भी शोध में खुलासा किया जायेगा। शोध में 50 प्रतिशत महिलाओं को भी शामिल होंगी। डॉ. वेद के अनुसार जब लोग एक दूसरे से बात करते हैं या फिर सांस छोड़ रहे होते हैं, तो सूक्ष्म कणों के माध्यम से भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म कण घंटों हवा में रह सकते हैं। वहीँ कफ की छोटी-छोटी बूंदें बड़े इलाके तक फैल सकती हैं।

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