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इस होड़ में रूस सबसे आगे निकल चुका है। उसने एलान किया है कि 10 अगस्त तक वो वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन करा लेगा और अक्टूबर से बड़े स्तर पर इसका उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। साथ ही साथ वैक्सिनेशन प्रोग्राम भी चलता रहेगा। हालांकि एकदम गुप्त तरीके से बनी इस रशियन वैक्सीन के बारे में बहुतों को खास जानकारी नहीं। ये क्या है, किसने बनाई और क्या ये ह्यूमन ट्रायल से गुजरी है- जानिए, इसके बारे में सबकुछ। वैक्सीन मॉस्को के मॉस्को के गामेल्या इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी में बनाई गई है। हालांकि रूस ने वैक्सीन की तैयारी का काम गुप्त तौर पर किया। एक ओर जहां दूसरे देश अपने यहां वैक्सीन को लेकर प्रयोगों और हर तरह के डेवलपमेंट की जानकारी दे रहे थे। रूस ने लंबी चुप्पी साधी हुई थी। इसी बीच जून में वैक्सीन पर ह्यूमन ट्रायल का पहला चरण शुरू हो गया।

स्पूतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक शुरू में मॉस्को की लैब में दो अलग-अलग फॉर्म के टीके पर प्रयोग हो रहा था, जिनमें एक तरल और एक पावडर के रूप में था। शुरूआती ट्रायल में दो ग्रुप बने, जिनमें हरेक में 38 प्रतिभागी थे। इनमें से कुछ को वैक्सीन दी गई, जबकि कुछ को प्लासीबो इफैक्ट के तहत रखा गया। यानी उन्हें कोई साधारण चीज देते हुए ऐसे जताया गया, जैसे दवा दी जा रही हो। प्रतिभागियों को मॉस्को के ही दो अलग-अलग अस्पतालों में निगरानी में रखा गया। दूसरे देशों से ट्रायल में शामिल ज्यादातर लोगों की घर से ही निगरानी हो रही थी, वहीं रूस इस मामले में अलग रहा। उसने हर प्रतिभागी को आइसोलेशन में रखते हुए जांच की।

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