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इसरो ने गुरुवार इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अभी चंद्रयान-2 में इतना ईंधन है कि यह सात और साल तक अपना कार्य करता रहेगा। चंद्रयान-2 को बीते साल 22 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था और यह बीते 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश हुआ था।

इसके साथ ही इसरो के प्रमुख सिवन ने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का निजीकरण नहीं होने जा रहा है। बल्कि इसमें सुधार किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने इसरो प्रमुख ने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में लगातार किए जा रहे सुधार आने वाले समय में भारत के लिए बहुत ही असकारी और निर्णायक साबित होंगे।

एक कार्यक्रम के दौरान सिवन ने बताया कि इसरो को लेकर लोगों में कई तरह के भ्रम हैं, जिन्हें वह साफ कर देना चाहते हैं। इसमें सुधार का अर्थ इसका निजीकरण नहीं है। आपको बता दें कि पिछले दिनों भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और इनकी गतिविधियों की निगरानी के लिए इंडियन स्पेस प्रोमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर की स्थापना की गई थी। इस पर सिवन ने जाननकारी देते हुए बताया कि इन सुधारों से इसरो भविष्य के दिनों में उत्पादन के बजाय अनुसंधान, क्षमता विस्तार और प्रौद्योगिकी के प्रयोगों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करेगा।

इतना ही उन्होंने कहा भारत आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में हासिल करने में जुटा है। जिसमें निजी कंपनियां प्रमुख रूप से  भागीदारी कर रही हैं। इसके साथ उन्होंने एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि इसरो चंद्रयान-2 मिशन को लेकर काफी उत्साहित है। उसे नासा से कुछ फोटो प्राप्त हुई हैं, जिनसे पता चलता है कि सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान दुर्घटना का शिकार हुआ लैंडर विक्रम अब भी काम कर रहा है। दुर्घटना के 10 महीने बाद नासा की तस्वीरों से इसरो की उम्मीदों को बल मिला है।

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