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गौरतलब है कि, नेपाल भारत के बीच सीमा को लेकर विवाद चल रहा है और पिछले दिनों नेपाल ने भारत के हिस्से पर दावा करते हुए उसे अपना हिस्सा बताया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच जमकर बयानबाजी हुई थी। भारतीय जनरल एमएम नरवणे तीन नवंबर को नेपाल के दौरे पर जाने वाले हैं। उससे पहले सीएम ओली ने रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी ले ली है। तो वहीं पूर्व रक्षामंत्री ईश्वर पोखरेल पीएमओ से जोड़ दिया गया है उनके पास भले ही कोई मंत्रालय इस वक़्त नहीं वो मंत्री पद पर बने रहेंगे।

कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए तिब्बत से लिपुलेख तक बनाई जाने वाली सड़क के बारे में जब चर्चा हुई तो नेपाल की तरफ से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आई थी और माना गया इसके प्रतिक्रिया के पीछे चीन की भूमिका की है। उस वक़्त नेपाल के रक्षामंत्री रहे ईश्वर पोखरेल ने दशकों से भारतीय सेना का हिस्सा रहे गोरखा सैनिकों को भड़काने की भी कोशिश की थी। नेपाल के रक्षा मंत्री ने कहा था कि, भारतीय सेना प्रमुख जनरल नरवणे की टिप्पणी ने नेपाली गोरखा सेना के जवानों की भावनाएं आहत हुई हैं।

जो देश की रक्षा के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर देते हैं। इसके आलावा पोखरेल ने जनरल नरवणे के नेपाल दौरे का भी विरोध किया था। पीएम ओली के बेहद खास बताए जाते हैं पोखरेल, उन पर चीन के साथ चिकित्सा उपकरणों की खरीद को लेकर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हुए हैं। कहा यह भी जा रहा है कि पोखरेल भले ही देश के रक्षा मंत्री थे लेकिन उनके संबंध अपनी ही सेना प्रमुख जनरल पूर्ण चंद्र थापा के साथ ठीक नहीं थे।

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