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आपको बता दें उत्तराखंड के हरिद्वार में एक कार्यक्रम में डोभाल ने कहा कि किसी की इच्छा पर नहीं बल्कि आवश्यकता या खतरे को देखकर युद्ध करेंगे। डोभाल ने आगे कहा, ‘हम वहीं लड़ेंगे जहां पर आपकी इच्छा है, यह कोई जरूरी तो नहीं। हम वहीं लड़ेंगे जहां से हमें खतरा आ रहा है। हम उस खतरे का मुकाबला वहीं करेंगे। यह एक बात है मगर हमने अपने स्वार्थ के लिए नहीं किया। हम युद्ध तो करेंगे, अपनी जमीन पर भी करेंगे और बाहर भी करेंगे। मगर अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं परमार्थ के लिए करना पड़ेगा।’ अजित का ये बयान चीन के खिलाफ समझा जा रहा था मगर सरकार ने सामने आकर सफाई दी कि ये बयान चीन के खिलाफ नहीं है।

केंद्र सरकार ने डोभाल के बयान पर साफ कहा कि ये बयान चीन को लेकर नहीं कहा गया है बल्कि ये भारत की आध्यात्मिक सोच है मगर बावजूद इसके ये बयान साफ करता है कि भारत युद्ध की धमकी या खतरे से नहीं डरता और युद्ध के लिए हमेशा तैयार है और रहेगा।

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