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लालू प्रसाद यादव की पार्टी के नेताओं ने फिर एक बार नितीश कुमार को गठबंधन करने का न्योता दे डाला. शर्त यह है की, अगर बिहार में नितीश कुमार की पार्टी राजद के साथ गठबंधन कर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाती है तो 2024 में विपक्ष नितीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोसित कर देगा.

वहीं बात करें बीजेपी और राजद के रिश्तों की तो यह बहुत पहले से ही ऐसे रहें हैं. 2014 लोकसभा चुनाव में NDA के पास दो रास्ते थे. पहला वो सेक्युलर पार्टी बनकर नितीश कुमार को प्रधानमंत्री के रूप में आगे पेश करे और दूसरा वो कट्टर हिंदूवादी नेता नरेंद्र मोदी को आगे करे. BJP के तमाम बड़े नेताओं ने नरेंद्र मोदी को चुना जबकि नितीश कुमार के भी साथ काफी नेता थे.

2014 लोकसभा चुनाव में नितीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को बिहार में चुनाव प्रचार भी नहीं करने दिया था. बाद में यह NDA से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गए. उसके बाद लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद यह वापिस NDA में शामिल हो गए और अब बिहार के हारे हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वजह से जीत तो गए लेकिन अब फिर से गठबंधन में सबकुछ ठीक होने की ख़बरें नहीं आ रही.

कुछ दिन पहले अरुणाचल प्रदेश में जदयू के छह विधायकों के भाजपा में शामिल हो गए थे. उसके बाद अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा स्पीकर उदय नारायण चौधरी ने नितीश कुमार को बड़ा ऑफर दिया हैं उन्होने कहा है की, “अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तेजस्वी यादव को सीएम बना दें, तो पार्टी उनको 2024 में प्रधानमंत्री के लिए समर्थन देगी. साथ ही कहा कि नीतीश को विपक्ष का नेतृत्व करना चाहिए.”

यह बात कहने में जितना आसान हैं, उतना हैं नहीं. इसके लिए आपको 2019 लोकसभा चुनाव पर एक नज़र डालनी होगी. महागठबंधन में शामिल हर एक पार्टी का नेता खुद को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताता था. फिर चाहे राहुल गाँधी हो, ममता बनर्जी, मुलायम सिंह यादव, मायावती आदि. एक तरफ NDA थी यानी BJP और उसके गठबंधन वाले दल जिनका एक ही नेता था नरेंद्र मोदी और दूसरी तरफ हर कोई प्रधानमंत्री.

2024 के लिए भी हालात यही हैं शिवसेना के उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के राहुल गाँधी को अभी से प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा हैं. आने वाले समय में यह दावेदारियां और बढ़ेंगी ऐसे में क्या उस समय राजद के कहने पर पूरा विपक्ष नितीश कुमार को अपना नेता मानेगा? यह जितना कहने में आसान है उतना है नहीं और यह बात नितीश कुमार एक बार गठबंधन करके जान चुके होंगे.

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