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बेटों और बेटियों में करते हैं फर्क

मीडिया से बात करते वक्त पैथर गांव की आंगनबाड़ी केंद्र प्रभारी कलावती ने बताया कि लोगों की मानसिकता ऐसी है। लोगों की काउंसलिंग भी की जाती है कि बेटों और बेटियों का बराबर ख्याल रखें। फिर भी लोग बच्चों के खानपान में फर्क कर देते हैं। बेटियों के बारे में पूछो तो लोग कहते हैं कि कुछ खाती नहीं और जब अन्नप्राशन कराते हैं तो खूब खाती हैं।

बंद रहता है आंगनबाड़ी केंद्र

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कुपोषण की स्थिति देखने निकले तो हमें यह पहली तस्वीर दिखी। स्कूल चूंकि बगल में ही था तो हम वहां पहुंच गए। गेट के ठीक बगल में न्याय पंचायत संसाधन केंद्र पर ताला लगा था। पहले आंगनबाड़ी केंद्र इसी में चलता था।

नहीं आतीं आंगनबाड़ी केंद्र प्रभारी

बाद में वह स्कूल के अंदर एक कमरे में चलने लगा। झांक कर देखा तो बिल्कुल खाली था। दो शिक्षिकाओं का सामान उसमें रखा हुआ था। प्रधानाध्यापक मंजू लता और शिक्षिका नम्रता त्रिवेदी बोलीं कि केंद्र बंद है। आंगनबाड़ी केंद्र प्रभारी आशा कार्यकर्ता निर्मला देवी नहीं आतीं।

अभिभावकों को बुलाकर दे देते हैं बच्चों का काम

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जब हमने पूछा कि बच्चे नहीं आते, तो बोलीं कि कोरोना की वजह से ऑन लाइन पढ़ाई हो रही है, लेकिन ज्यादातर अभिभावकों के पास संसाधन नहीं हैं। यह पूछने पर कि फिर क्या करती हैं, उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बुलाकर बच्चों का काम दे देते हैं। मिड डे मील का खाद्यान्न राशन के साथ दे दिया जाता है।

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