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आज की हमारी कहानी एक ऐसे हीं यूपीएससी कैंडिडेट्स की है जिसने अपने जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव देखे। शुरू से लेकर यूपीएससी की तैयारी तक उन्होंने बहुत सारी समस्याओं का सामना किया परंतु अपने माता-पिता की बढ़ाई गई हिम्मत से उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आगे बढ़ते रहे। साल 2010 में उन्हें यूपीएससी की परीक्षा में सफलता मिल हीं गई और वह आईआरएस ऑफिसर बने।

शेखर कुमार (Shekhar Kumar)

शेखर कुमार बिहार (Bihar) के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं। उन्होनें अपने जीवन में पैसे की किल्लत, परीक्षा छूटना तथा माता-पिता का एक्सीडेंट जैसी कई मुश्किलातों का सामना किया है। वे सारी मुश्किलों का डटकर सामना करते हुए खुद को एक सफल व्यक्ति के तौर पर उभारा है। शेखर एक इंटरव्यू में बताते हैं कि उन्हें अपनी भाषा को लेकर बहुत हीं मुश्किलें आई क्यूंकि उनकी इंग्लिश बहुत हीं ज्यादा खराब थी।

भाषा के कारण शिक्षा में हुई परेशानी

शेखर की शुरुआती पढ़ाई हिंदी मीडियम स्कूल से पूरी हुई। इस कारण आगे चलकर उन्हें बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके माता-पिता उन्हें तथा उनके भाई को अच्छी शिक्षा देना चाहते थे जिसके लिए उन्हें आगे इंग्लिश मीडियम में पढ़ने के लिए भेजा। अंग्रेजी माध्यम उनके लिए बिल्कुल नया था जिस कारण उन्हें पढ़ाई करने में बहुत हीं परेशानी हुई परंतु उन्होंने हार नहीं मानी और निरंतर प्रयास करते रहे। शेखर के पिताजी चाहते थे कि शेखर एडमिनिस्ट्रेटिव फील्ड में जाएं और वह इसके लिए हमेशा शेखर को प्रोत्साहित भी करते थे।

पिता की कहीं बातों का अनुसरण

शेखर के पिता का मानना हैं कि यहाँ सिर्फ़ तीन हीं लोगों को जाना जाता है, पीएम, सीएम और डीएम इसलिए वह शेखर को उस रूप में देखना चाहते थे। हालांकि शेखर को इस क्षेत्र में जाने की बिल्कुल भी रूचि नहीं थी, परंतु पिता के द्वारा कही गई ऐसी बातों से प्रेरित होकर वह इस क्षेत्र में जाने के बारे में सोचने लगे। उनका मन आर्ट्स लेने का था, परंतु पिता के कहने पर उन्होंने साइंस ले ली। इसके बाद शेखर ने स्टैस्टिक्स विषय चुना और इसीमें अपना ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन पूरा किया।

एक्सीडेंट से शेखर को लगा बड़ा झटका

शेखर के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से हीं अच्छी नहीं थी उनकी तथा उनके भाई की पढ़ाई जैसे-तैसे पूरी हो रही थी। इसी बीच उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक हादसे में उनके माता-पिता दोनों की एक्सीडेंट हो गई, जिसमें उनके माता को कमर के नीचे का शरीर पैरालाइज्ड हो गया और उनके पिता कोमा में चले गए। उन दोनों भाइयों के लिए यह सबसे मुश्किल का समय था। यह समाचार सुनकर शेखर तथा उनके भाई पढ़ाई छोड़कर घर वापस आ गए। कुछ समय बाद उनके पिता डिप्रेशन में चले गए और उनकी परेशानियां और बढ़ गई। ऐसे हालात में उनकी मां ने उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि मुश्किलों से हार ना मानते हुए पढ़ाई को जारी रखो। दोनों भाइयों ने मां की बात सुनते हुए आगे बढ़ने का फैसला किया।

मां की बातों को मानकर पाई सफलता

शेखर ने सारी मुश्किलों से जूझते हुए कड़ी मेहनत कर अपने सेकेंड अटेम्प्ट की तैयारी की परंतु फिर से उनकी किस्मत में एक बार उनका साथ नहीं दिया और वह मंजिल तक पहुंचते-पहुंचते रह गए। शेखर मेन्स परीक्षा में सिर्फ 10 मिनट लेट पहुंचे जिसकी वजह से एग्जामिनेशन हॉल में उन्हें जाने नहीं दिया गया जिसके बाद वह पूरी तरह टूट चुके थे। उनमें अब बिल्कुल भी हौसला नहीं था कि वह आगे पढ़ें और वह इससे निराश होकर अपने पहले के काम में वापस लौट गए। उनकी मां को जानकर दुख हुआ जिसके बाद बेटे को समझाते हुए उनकी मां ने कहा कि एक बार मेरे कहने पर परीक्षा दो। बहुत समझाने पर शेखर परीक्षा देने के लिए मान गए और फिर से जी तोड़ मेहनत करने लगे। उनकी इस बार की कोशिश रंग लाई और वे यूपीएससी की परीक्षा में सफल हुए और वह आईआरएस ऑफिसर पद के लिए चयनित हुए।

शेखर सभी कैंडिडेट्स को देते हैं यह सलाह

शेखर यूपीएससी के कैंडिडेट्स को कहते हैं कि इस परीक्षा में कड़ी मेहनत करके सफलता अवश्य प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए आपका बैकग्राउंड तथा आपकी भाषा कुछ भी मायने नहीं रखता। परंतु ऐसा ना सोंचे कि अगर आप सिविल सर्विस में सेलेक्ट नहीं हो पाए तो आप कुछ और नहीं कर सकते। आप इसके लिए दो से तीन बार प्रयास जरूर करें लेकिन अपने लिए ऑप्शनल भी एक बार प्रयास जरूर करें अपने लिए ऑप्शनल भी रखें। अंत में शेखर यही कहते हैं कि मेहनत करने पर हर कोई इस परीक्षा में सफल हो सकता है।

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