11

इन्द्रायण के 51 फायदों के बारे मेंं बताएगें। इन्द्रायण मुख्य रूप से 3 प्रकार की होती है। पहली छोटी इन्द्रायण, दूसरी बड़ी इन्द्रायण और तीसरी लाल इन्द्रायण होती है। इन्द्रायण एक लता होती है जो पूरे मरू भूमी या बलुई क्षेत्रों में पायी जाती है, भारत में यह खेतों में उगाई जाती है।इसे हिन्दी में इन्द्रायण तथा अंग्रेजी कोलोसिनथ (Colocynth) कहते है। इसके अन्य भाषाओं में निम्न नाम है संस्कृत में इन्द्रवारुणी, गुजराती में इन्द्रावण, मराठी में इन्द्रायण वइन्द्रफ, बंगाली में राखालशा, अरबी में इंजल व अलकम, फारसी में खरबुज-ए-तल्ख, तेलगू में एतिपुच्छा आदि नामो से जानी जाती है।\

इन्द्रायण (Colocynth) के 3 प्रकार – छोटी, बड़ी और लाल इन्द्रायण :

छोटी इन्द्रायण : छोटी इन्द्रायण को संस्कृत में एन्द्री, चित्रा, गावाक्षी, इन्द्रवारुणी आदि नाम से जाना जाता है। छोटी इन्द्रायण की बेलों के पत्ते खण्डित तथा इसकी डंठलों में रोम (छेद) होते हैं। पत्र वृन्त के पास में इसका फूल तथा एक लम्बा सूत्र निकलता है। इसी सूत्र की सहायता से इसकी बेले पेड़ों में लिपटकर आसानी से पूरे पेड़ों में फैल जाती हैं। छोटी इन्द्रायण के फूल घंटे के आकार के गोल, पीले रंग के होते हैं।

एकलिंगी नर और मादा फूल अलग-अलग होते हैं।बड़ी इन्द्रायण : बड़ी इन्द्रायण को संस्कृत में महाफला और विशाला कहते हैं। बड़ी इन्द्रायण की लताएं कुछ ज्यादा बड़ी होती हैं, इसके पत्ते तरबूज के पत्तों के जैसे कई भागों में बटे हुए होते हैं। बड़ी इन्द्रायण के फूल पीले रंग के होते हैं। बड़ी इन्द्रायण के फल 4 से 12 सेमी गोल और लंबे होते हैं। बड़ी इन्द्रायण का छोटा फल रोमों से ढका रहता है।

बड़ी इन्द्रायण के कच्चे फलों में सफेद रंग की धारिया प्रतीत होती हैं तथा फल के पकने पर ये धारिया स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ने लगती हैं और फल का रंग नीला हरा हो जाता है। बड़ी इन्द्रायण के फल की मज्जा (बीच का भाग) लालरंग का तथा बीज पीले और काले रंग के होते हैं।लाल इन्द्रायण : लाल इन्द्रायण बेल बड़ी इन्द्रायण के ही समान होती है लेकिन इसके फूल सफेद रंग के तथा फल पकने पर नींबू के समान लाल रंग के हो जाते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here