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दरअसल ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि 12 वर्ष तक की आयु के बच्चे पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक रहता है। बच्चे को चोट तभी लगती है जब बच्चे की कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति अनुकूल नहीं होती है। बच्चे की चंचलता के कारण उसे अक्सर चोट लगती है। बच्चे को अर्ध्यचंद्र आकार का लॉकेट पहनाने से उसका स्वास्थ्य अच्छा रहता है। चोट यह दुर्घटना से भी उसका बचाव होता है। घर के बड़े और बच्चों को दुर्घटनाओं से बचाने के लिए हर मंगलवार को हनुमान मंदिर जाकर मिटटी के दिए से चमेली के तेल का दिया जलाना चाहिए। जब भी हनुमान मंदिर जाएं तो बच्चे की कलाई में मंदिर की मौली अवश्य लगायें।

घर में रखें पिरामिड

हनुमान मंदिर में गुड़ चने का प्रसाद बाँटने से भी लाभ मिलता है। परिवार के सदस्यों को दुर्घटनाओं से बचाने के लिए घर की छत पर लाल पताका फहराएं। इसके अतिरिक्त बच्चे के बिस्तर के सिरहाने पर जूते या चप्पल न रखें और न ही पानी से भरा कोई पात्र रखें। बच्चे को मोती धारण कराने से भी दुर्घटना से बचाव होता है। वास्तुशास्त्र के मुताबिक पिरामिड पॉजिटिव एनर्जी का स्‍त्रोत होता है। इसे रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

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