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जासूसी के बात जब भी हम करते हैं तो सबसे पहले 90 के दशक के लोगों के मन में ब्योमकेश बक्शी का नाम सामने आता है। जासूसी की दुनिया में हमने सबसे ज्यादा टीवी पर उन्हीं का नाम सुना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसी भी मशहूर जासूस थी जिसके सर 50 हजार लोगों की मौत का इल्जाम था।

 

इन्हें मार्गरेट गीर्तोईदा जेले उर्फ माता हारी के नाम से जाना जाता था। इतिहास में उन्हें तकरीबन 50 हजार से ज्यादा लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहराया गया है। इतना ही नहीं उनके ऊपर जर्मनी के लिए जासूसी करने के भी गंभीर आरोप लगे हैं। कहा जाता है कि माता हारी के कई सारे प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंध थे।

माता हारी को जिले के नाम से भी जाना जाता था। वह ना केवल एक मशहूर जासूस थी, बल्कि वह एक बेहद फेमस डांसर भी थी। उनकी लोकप्रियता के चर्चे राजनीति से लेकर अभिनय की दुनिया तक थे। फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के दौरान माता हारी पेरिस में एक डांसर के तौर पर दुनिया भर में मशहूर थी।

इसी के माध्यम से वह एक देश की सीक्रेट इंफॉर्मेशन को इधर से उधर करने का काम भी करती थी और अपने इस काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्होंने अपनी अदाओं का भरपूर प्रयोग किया था। वह बड़े-बड़े लोगों को अपनी अदाओं पर घायल कर उनसे उनकी जिंदगी के राज उगलवाने का काम करती थी।

बता दे जर्मनी के प्रिंस सहित दुनिया के कई बड़े लोग उनकी अदाओं के मुरीद थे। माता हारी का जन्म 1876 में नीदरलैंड में हुआ था। उनकी परवरिश पेरिस में हुई थी और उनकी शादी नीदरलैंड के शाही सेना के एक अधिकारी से हुई थी। जो उस वक्त इंडोनेशिया में तैनात था। दोनों तत्कालीन डच ईस्ट इंडिया के द्वीप जावा में रहते थे।

इंडोनेशिया में ही वह एक नई डांस कंपनी में शामिल हुई और वहां उन्होंने अपना नाम बदलकर माता हारी रखा। साल 1960 में उन्होंने नीदरलैंड से लौटने के बाद अपने पति को तलाक दे दिया और पेरिस चली गई। पैरिस में वह एक साल किसी राजनीति के जानकार के साथ रही और इसी दौरान फ्रांस की सरकार ने उन्हें जासूसी करने के लिए नियुक्त किया। हालांकि इस काम के बदले उन्हें काफी बड़ी रकम भी दी जाती थी।

कहा जाता है कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान माता हारी को हथियार बनाकर फ्रांस में जर्मनी मिलिट्री ऑफिसर की कई सारी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की थी। इसी तरह की कुछ फ्रांस की महत्वपूर्ण जानकारियां उन्होंने जर्मनी की सरकार से साझा की। दरअसल माता हारी को लालच हो गया था और यही लालच उनके लिए मुसीबत बना।

फ्रांस सरकार में कार्यरत होते हुए भी वह सरकार को धोखा देकर जर्मनी से उनकी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर रही थी। यह डबल गेम का खेल उन्हें भारी पड़ा। वह दोनों सरकारों से अपने काम के पैसे ले रही थी, लेकिन ज्यादा दिन तक वह अपने इस डबल गेम को नहीं चला पाई।

फ्रांस की खुफिया एजेंसी को जब इस बात की भनक लगी तो माता हारी को साल 2017 में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद ही उन्हें 50 हजार लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहराया गया और 15 सितंबर 1917 को उन्हें गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतारने की सजा दी गई। इस डबल गेम के चक्कर में मातहारी ने 41 साल की उम्र में ही अपनी जिंदगी गवा दी।

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