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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में 55वीं रैंक लाना कोई मामूली बात नहीं होती और वो भी तब जब आप पिछले पांच बार से इस परीक्षा में फेल होते आ रहे हों। इससे एक तो आपका मनोबल भी कम हो सकता है दूसरा अब इसे पार कर पाने की सारी इच्छा छोड़ देना। मगर नहीं, अक्षत कौशल कुछ अलग थे, हालांंकि 5 बार असफल होने के बाद उनके मन में भी इस तरह के विचार आ चुके थे।

मगर उसी दौरान कुछ ऐसा हुआ की अंतिम 17 में उन्होंने कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया कि सबसे कठिन माने जाने वाली इस परीक्षा में उन्होंने 55वी रैंक हासिल कर ली। यकीनन अक्षत कौशल की सक्सेस स्टोरी उन सभी उम्मीदवारों के लिए मिसाल है जो एक असफलता से पीछे हट जाते हैं। इन पांच सालों में उन्होंने पांच सबक सीखा और ढेर सारा अनुभव जिसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

अक्षत के अनुसार जब तक आप गलती करते नहीं है तबी तक आप दिख भी नहीं पाते हैं और सीखने को तो इंसान अपनी गलतियों से भी सीख सकता हैं। मगर जब आप सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे होते हैं तो यह बहुत ही आवश्यक हो जात है की आप परीक्षा के नेचर को समझें। तभी संभव है कि आप अपनी तैयारी को पुख्ता रख पायेंगे और इस दौरान कोशिश करें कि खुद गलतियां ना करने बल्कि जब जब मौका मिले दूसरे की गलतियों से सीखें।

इस बात का विशेष ध्यान रखें की कभी भी किसी विषय को लेकर ओवर कॉन्फिडेंस में नहीं आना चाहिए। अक्सर लोग सोचते हैं कि मुझे ये विषय तो आता ही है, ऐसा सोचने से आप उसके बारे में नहीं पढ़ते, परिणाम स्वरूप होता ये है कि आपका वही विषय आपको परीक्षा में सफलता दिलाने से रह जाता है।

अक्षत बताते हैं कि तैयारी के दौरान जब वो तीसरी बार नाकाम हुए तो उसके बाद उन्हें लगा कि मैं अब वापस अपनी प्राइवेट जॉब में लौट जाऊं। लेकिन उसी वक़्त मुझे मेरे दोस्तों ने समझाया। अक्षत कहते हैं कि तैयारी के लिए कभी खुद को वेल प्रीपेयर्ड ना समझें, इसके लिए एक सही ग्रुप का चयन जरूरी है, जो आपको न सिर्फ सही सलाह दें बल्कि गलतियों पर भी आपकी चने के झाड़ पर चढ़ाये।

अक्षत ने बताया कि मेन्स को लेकर हमेशा से उन्हें ऐसा लगता था कि वो बहुत अच्छा लिख लेते हैं। उनकी कुछ पीस अखबार में भी छप चुकी थी, इससे उनके अन्दर एक आत्मविश्वास भी था। बस यही कॉन्फीडेंस कब ओवर कॉन्फिडेंस में बदल गया इसका पता भी ना चला और साल 2016 की परीक्षा ख़राब चली गई। ऐसे में यदि आप किसी विषय को अपनी ताकत मानते हैं तो भी उसका अभ्यास भी जरूरी है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि यदि आपकी तैयारी अच्छी रहगी तो सफलता मिलनी तय है। लेकिन, इसके लिए आपको लगातार अपने दिल की सुननी होगी। अक्षत बताते हैं की उन्होंने तमाम ग़लतियों से सीखा, लेकिन 17 दिन की तैयारी में निकाल भी लिया। हालांकि, इसके पहले उन्होंने अपना कॉन्सेप्ट अच्छी तरह से तैयार कर लिया था। इंटरव्यू की तैयारी में भी खुद के ऊपर फोकस था और आखिरकार वर्ष 2017 में उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल कर ही लिया।

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