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देश में करोड़ों की दूसरी लहर(Second Wave) ने लोगों के सामने आफत बनकर खड़ी हुई है। यामा मारी बेहद जानलेवा हो चुकी है। राज्यों के कई अस्पतालों में बेड वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की किल्लत देखने को मिल रही है। ऑक्सीजन की कमी होने के कारण बहुत से अस्पतालों में मरीजों को एडमिट नहीं किया जा रहा है। इससे परिजन मरीजों के इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। और पूरी कोशिश कर रहे कि उनके मरीज को ऑक्सीजन किसी न किसी तरह मिल जाए जिससे उनकी जान बच सके।

ऐसा ही एक दोस्ती और इंसानियत का मामला सामने आया है। एक शख्स ने ऐसा काम किया है। जो काबिले तारीफ है। उसकी जितनी तारीफ की जाए वह कम ही है। आपने दोस्ती के किस्से न जाने कितने सुने होंगे लेकिन इस मामले को जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

दरअसल 38 साल के एक स्कूल शिक्षक देवेंद्र अपने दोस्त रंजन अग्रवाल के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर झारखंड के बोकारो से नोएडा तक पहुंच गए। इस बीच के लंबे सफर को उन्होंने बहुत जल्दी टाइप कर लिया। बोकारो से नोएडा तक का सफर 24 घंटे का है। जिसकी दूरी 14 किलोमीटर है। खबर के अनुसार देवेंद्र को रास्ते में एक बार बिहार और एक बार यूपी पुलिस ने रोका, लेकिन पूरे केस को समझने के बाद उन्होंने उसे जाने दिया।

अब ठीक है मेरा दोस्त

हालाकी बोकरा मैं भी ऑक्सीजन सिलेंडर मिलना आसान नहीं था लेकिन अपने यार के लिए देवेंद्र ने शहर में कई ऑक्सीजन प्लांट और सप्लायर से पता किया उन्होंने कहा कि उन्हें फिर से खाली सिलेंडर ही मिल सकेगा। आखिर में वह बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र में झारखंड स्टील ऑक्सीजन प्लांट के संचालक तक पहुंच गए हैं। तकनीशियन ने उन्हें पूरा सिक्योरिटी डिपॉजिट लेकर सिलेंडर देने पर सहमति जताई।

उन्हें 10000 का सिलेंडर और 400 की ऑक्सीजन मिली देवेंद्र ने बताया कि उनके दोस्त अब काफी स्वस्थ हैं। उन्हें जल्द ही हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। आखिर एक दोस्त की अपने दोस्त के लिए यह कड़ी मेहनत रंग लाई।

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