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देश में कोरोना की दूसरी लहर ने तबाही मचाई हुई है। दिल्ली, लखनऊ, पटना, कोलकाता, मुंबई, रायपुर, जयपुर,अहमदाबाद सभी जगह एक जैसे ही हालात है। संक्रमण के रोजाना हजारों मामले सामने आ रहे हैं, जिन्हे बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है। अस्पताल में बेड, दवा और ऑक्सीजन की भारी किल्लत है, जिसकी वजह से अब तक कई लोगों की जान चुकी है। दिल्ली में जारी ऑक्सीजन की कमी का मामला देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती है, जिस पर कोर्ट में सुनवाई भी हुई।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि कितना ऑक्सीजन आपने दिल्ली को दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र ने यह कैसे कहा कि दिल्ली को सुप्रीम कोर्ट ने 700 एमटी एक्सीजन सप्लाई का आदेश नहीं दिया। कोर्ट को केंद्र सरकार की तरफ से बताया गया कि ऑक्सीजन की मांग अप्रैल माह से पहले नहीं थी। इसकी मांग तो अचानक ही बढ़ी है। 450 एमटी ऑक्सीजन की जरूरत दिल्ली को है।

केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि ‘कोर्ट के आदेश का पालन करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। वो नाकाम अधिकारियों को जेल में डालें या फिर अवमानना के लिए तैयार रहें। दिल्ली को ऑक्सीजन ऐसे नहीं मिलेगी। वो तो काम करके ही मिलेगी। दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार नोटिस जारी किया गया है, जिसके बाद केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इस नोटिस को चुनौती दी गई थी। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की बेंच ने की।

दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को लेकर मंगलवार को हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए नोटिस जारी किया था, जिसे लेकर केंद्र ने आज कोर्ट में बताया कि मीडिया में ऐसे दिखाया जा रहा है कि जैसे केंद्र ऑक्सीजन के मुद्दे पर असंवेदनशील है। यही वजह यही कि हमने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

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