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कोरोना वायरस की दूसरी लहर दुनिया के कोने कोने में पहुंच गई है। यह दुनिया की सातवीं सबसे ऊंची चोटी धौलागिरी तक भी पहुंच गया है। खबर आ रही है कि पहाड़ स्थित कैंप से 19 लोगों में से 7 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं। अन्य 12 लोगों में कोरोनावायरस के सिम्टम्स नजर आने पर उनको जांच के लिए भेजा गया है। बीते माह अप्रैल में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की तैयारी कर रहे नार्वे के एक पर्वतारोही को कोरोना ने अपने चपेट में ले लिया है।

सीएनएन ने अपनी एक रिपोर्ट में टूर ऑपरेटर सेवन समिति के चेयरपर्सन मिंगामा शेरपा के हवाले से 19 लोगों को कैंप से निकाले जाने की जानकारी दी थी। इनमें से 7 लोगों की रिपोर्ट को रोना पॉजिटिव आने का दावा किया गया है। धौलागिरी दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट के पश्चिम में 345 किलोमीटर की दूरी पर है। पोलैंड के एक पर्वतारोही पावेल मिखालस्की की के अनुसार एवरेस्ट से भी अप्रैल के बाद पॉजिटिव आने पर 30 लोगों को बेस कैंप से निकाला गया है।

पिछले साल कोरोना के समय में जी ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर पर्वतारोहण के परमिशन देने की प्रक्रिया रद्द कर दी थी। वही नेपाल ने भी अपने हिस्से में मौजूद चोटी पर कार्यक्रम को बंद कर दिया था। बढ़ती कोरोनावायरस महामारी के बावजूद नेपाल सरकार ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के आरोहण के लिए इस साल अब तक 394 परमिट जारी किए हैं।

नेपाल में पर्वतारोहण है कमाई का बड़ा जरिया

नेपाल को राजस्व का बड़ा हिस्सा पर्यटन से ही मिलता है। देश में बहुत से लोग ऐसे हैं। जो अपने जीवन यापन के लिए पर्वतारोहण पर ही निर्भर है। पिछले साल पाबंदी लग जाने के कारण इस साल नागरिकों ने बेहतर हालात की उम्मीद लगाई हुई थी, लेकिन कोरोनावायरस की लहर ने उनकी उम्मीद पर पानी फेर दिया। पिछले साल से ज्यादा इस साल के हाल खराब हैं।

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