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दिव्या को अपने बड़े बेटे को कॉलेज भेजने के बाद, जो वक्त बचता था. उसी समय उनके मन में इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स करने का विचार आया. उनका ये संघर्ष भरा सफ़र साल 2004 को शुरू हुआ था, जोकि उनकी उम्र से ताल्लुक रखने वाली हर महिला के लिए संभव नहीं है.

आज के समय में दिव्या एक सक्सेस फुल इंटीरियर डिजाइनर  बन चुकी है. अबतक दिव्या की कंपनी 250 से अधिक मल्टीनेशनल कम्पनियों के ऑफिसों को सक्सेसफुली डिजाईन कर चुकी है.

बड़े बड़े ब्रांड्स है इस दिव्या के कस्टमर

बात करे दिव्या के कस्टमरों की तो वो सिर्फ टर्नकी इंटीरियर डिजाइनिंग प्रोजेक्ट्स पर ही काम करना पसंद करती है. अब तक वो बहुत मल्टी नेशनल कंपनियों के साथ काम कर चुकी है. इनके कस्टमर बड़े-बड़े ब्रांड्स है जैसे की ओलंपस, कोन, विलियम ग्रांट्स एंड संस, एबट, पैनासोनिक, कोरस, टोयोटा इत्यादि .

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी दिव्या

आज के दौर में जहाँ महिलाओं के सपने बेहद ही सीमित होते है वही दिव्या ने 42 साल की उम्र में भी अपनी मेहनत से अपनी किस्मत चमका डाली. उन्होंने अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ जिस तरह ट्रेनिंग ली वो काबिले तारीफ है. आज के समय में दिव्या के एक सफल बिजनेस वूमेन के तौर पर काम कर रही है. दिव्या न केवल तमाम महिलाओं के लिए बल्कि युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं.

आज दिव्या साबित कर चुकी है कि किसी भी चीज़ को शुरू करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती. यदि दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ लक्ष्य का पीछा किया जाए, तो सफलता अवश्य ही आपके कदमो तले आपका स्वागत करेगी.

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