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आज के संसार में हम दवाईयों पर और मेडिकल सुविधाओं पर निर्भर रहने लगे है लेकिन धीरे धीरे सब कुछ भूलने लग गये है. अपना ज्ञान और अपना विज्ञान जो कभी हमारे बड़े बुजुर्गो के पास था वो धीरे धीरे विलुप्त हो रहा है लेकिन आज भी हमारे बुजुर्ग है जिनके पास अथाह ज्ञान का भण्डार है और उनमे से ही एक से हम आपको आज मिलवाने भी जा रहे है.

ये है लक्ष्मी कुट्टी जिन्हें जंगल की दादी भी कहा जाता है और इनके पास में एक दो या दस नही बल्कि पूरी 500 तरह की आयुर्वेदिक दवाये बनाने का गजब का अनुभव मौजूद है. इनकी उम्र पूरे 75 साल है और इन्होने अपने जीवन भर में ज्ञान अर्जित कर करके इस तरह की विद्या को अर्जित किया है. वो राष्ट्रपति से भी पद्मश्री के द्वारा सम्मानित की जा चुकी है जो अपने आप में बहुत ही बड़ी बात है.

बात करे उनके निवास की तो वो तिरुवंतपुरम के नजदीक कल्लर जिले में एक छोटी सी झोंपड़ी में रहती है. ये सब तो कुछ भी नही वो साउथ इंस्टिट्यूट में लेक्चर देने के लिए भी जाती है जो बताता है कि उनका ज्ञान कितना बड़ा और विस्तृत है. उनके पास में इलाज करवाने के लिए हजारो लोग आये है और उन्होंने लगभग हर किसी को ठीक करके भेजा है.

वो किसी को भी ठीक करने के लिए पेड़, पौधे, छाल और नेचुरल चीजो का इस्तेमाल करती है और उनकी बताई हुई चीजो से वाकई में कही न कही लोग स्वस्थ होकर के लौटते है. बड़ी बात ये है कि वो एक आदिवासी समूह से है लेकिन फिर भी उन्होंने दस किलोमीटर दूर जा जाकर के पढ़ाई करती थी और इस तरह से लक्षमी कुट्टी ने अपना ज्ञान इस दुनिया के लिए अर्जित किया और अब दुनिया की मदद कर भी रही है.

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