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एक ऑटोमोबाइल रिपेयर शॉप के मालिक कमल ने पुलिस स्टेशन में मीडिया को बताया, ‘मेरे बेटे ने अपना होश खो दिया था। वह गालियां देता था और यहां तक कि पैसे के लिए वह मुझे और अपनी मां को पीटता भी था। एक बार उसने अपनी मां का हाथ ही तोड़ डाला था। मैं उसे एक डॉक्टर के पास भी लेकर गया था और उसका ट्रीटमेंट चल रहा था, लेकिन अब वह हर दूसरे दिन पैसे की मांग करता था। हमारी जिंदगी जहन्नुम हो गई थी। मेरे पास इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं था।’

हापुड़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) संजीव सुमन ने कहा, ‘कमल चंद ने ऋषभ की हत्या करवाने के लिए अपने पड़ोसी कमल पाल को दो लाख रुपये दिए थे। पाल ने अपने एक दोस्त प्रमोद को इसमें शामिल किया जो ऋषभ को अच्छे से जानता था। वे ऋषभ को सिंभौली लेकर गए जहां इन्होंने मिलकर शराब पी और बाद में ऋषभ की हत्या कर दी।’

एसपी ने कहा, ‘जब ऋषभ के माता-पिता ने आकर हमें मर्डर के बारे में बताया तभी हमें शक हुआ। वे ज्यादा परेशान नहीं दिख रहे थे और न ही उन्होंने शव का पोस्टमॉर्टम करवाने के लिए हमसे कुछ कहा। एफआईआर दर्ज कराने को लेकर भी उनमें कोई दिलचस्पी नहीं थी। बाद में गहरी छानबीन के बाद हमें इस पूरी प्रक्रिया के बारे में पता चला। हमने किराए पर लिए गए युवाओं से 1.3 लाख रुपये निकलवाया है।’

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